आज फिर से हाजिर हो आपके लोगो के सामने एक और न्यू chankya neeti के साथ तो चलिए स्टार्ट करते हे।

  जिस व्यक्ति का पुत्र आज्ञाकारी हों और उसकी पत्नी पतिव्रता हो उस व्यक्ति का जीवन सुख में बीतता है।

 यानी वे जीवित अवस्था में ही स्वर्ग का अनुभव कर लेता है अर्थात वो परम संतुष्ट अनुभव करता है।

 चाणक्य के अनुसार वो व्यक्ति ही पुत्र कहलाने के लायक हे माता पिता की आज्ञा का पालन कर्ता है।

  वास्तव में वो ही मनुष्य पिता कहलाने के योग्य है जो अपने पुत्र का अच्छे से पालन पोषण करता है।

    विश्वसनीय व्यक्ति ही सच्चा मित्र और पति को सूख देने वाली स्त्री ही सच्ची पत्नी कहलाती है।

  जिस प्रकार बाहर से मीठा दिखने वाले फल अधिकतर मीठे नही होते है।

  क्योंकि माता पिता की आज्ञा का पालन करना ही पुत्र का परम कर्तव्य है।

 वैसे ही हर मीठा बोलने वाले व्यक्ति अंदर से मीठा नही होता वो आपके लिए घातक साबित हो सकता है।

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