अगर आप लोग भी चाणक्य नीति पड़ने का सोख रखते तो इसको पढ़ सकते हे।

 चाणक्य के अनुसार मूर्ख और अज्ञानी मनुष्य केवल उपहास का पात्र बन कर रह जाता है।

 ज्ञानवान मनुष्यो के बीच उनकी स्थिति जैसे हंस के बेच कोए जैसी होती है।

 वे ना तो अपने विचार प्रकट करने योग्य होते है। और ना ही दोसरों के ज्ञानुक्त विचार स्वीकार करने में।

 यही कारण है की चाणक्य ने उनके माता पिता को अपनी संतानों का घोर शत्रु कहा है।

इसीलिए चाणक्य ने कहा है कि माता पिता अपनी संतानों को बुरी संगत से दूर रखे।

क्योंकि बुरी संगत उस हवा की तरह है। जो दिखती नही पर धीरे धीरे असर जरूर करती हे।

 कही न कही माता पिता की भी गलती होती है अपने बच्चो का ध्यान न रखना ।

 चाणक्य कहते है की सभी माता पिता से मेरी प्रार्थना हे की अपने बच्चो को सुरक्षित रखे हर वो बुरी आदत से।

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