आज मे आपको ऐसी short story in hindi  motivational स्टोरी बताने वाला हूँ अगर आप इन motivational स्टोरी को पढ़े के तो और  इसमें मिली शिक्षा  प्राप्त करंगे तो आपको आगे बढ़ने बहुत साहस मिलेगा। आपके अंदर successful होने का जोश जागेगा। तो जरुर इस आर्टिकल ओके पूरा पढ़े।short story in hindi motivational

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गाण्डीव धरी अर्जुन कि कहानी। short story in hindi motivational

गाण्डीवधारी अर्जुन कि कहानी। short story in hindi motivational

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पहले कहानी होने वाली शायद अपने यह कहानी सूनी हो गी। लेकिन यह कहानी पूरी तरह अलग होने वाली हे। और यह कहानी होने वाली हे। अर्जुन कि। अब आप लोग यह तो जानते हे। होंगे कि महाभारत का पांडव पुत्र अर्जुन को लोग धन्नजया और गांडीवधारी अर्जुन भी कहा जाता हे।short story in hindi motivational

आज मे आपको अर्जुन से जुड़ी एक short story in hindi motivational कहानी सुनाने वाला हूँ।  आप लॉगो ने यह भी सुना होगा कि अर्जुन को गाण्डीवधरी भी कहा जाता हे।short story in hindi motivational तो मे आपको आज यही बताने वाला हो कि अर्जुन को गाण्डीव धरी क्यूँ कहा जाता हे।

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1.     गांडीवधारी अर्जुन कि                             कहानी।

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यह कहानी स्टार्ट होती हे जब  पांडव हस्तिनापुर मे वापस आते हे और वाहा एक सभा लगायी जाती हे जिसमें ये सुनीसचीत किया जाता हे कि राजा कौन बनेगा वाहा पर उस सभा मे  काफी बड़े बड़े लोग उपस्थित होते हे। और सभा चालू कि जाती हे। और काफी देर बाद  ये निर्णय लिया जाता हे कि राजा पंडाव् बनने चाहिए फिर वाह पर एंट्री होती दुर्योधन और मामा शकुनि कि। और शकुनि मामा बहुत हि जटिल बुद्धि के होते हे वो वाहा पर आ कर पूरी बाजी को पलट देते हे। फिर दुर्योधन को राजा बनाने का निर्णय ले लिया जाता हे। और उसका राज्य अभिषेक भी घोषित कर दिया जाता हे।short story in hindi motivational

फिर वाहा पर आते हे वासुदेव श्री कृष्ण फिर वो अपना मत रखते हे और बोलते हे। क्या दुर्योधन राजा बनने के योग्य हे जो पांडवो को हटा कर इसको राजा बनाया जा रहा हे। क्या आप पुत्र मोह मे इतने अंधे हो गए हे कि कुछ दिख हि नहीं रहा हे। फिर भी वो नहीं मनते और बोलते हे कि राजा तो अब मेरा पुत्र हि बनेगा। तो फिर कृष्ण जी बोलते हे ठीक हे ये राजा बनेगे जब कोई व्यक्ति राजा बनता हे या उसकी राजा बनाने कि घोषणा कि जाती हे तब आप उससे अपना पहला दान माँग सकते हो और वो अपना पहला दान देने से कभी मना नहीं करता हे।short motivational story in hindi pdf

short story in hindi motivational अर्जुन कि अनसुनी गाथा।

फिर वो दान देने को तैयार हो जाते हे। फिर कृषन् जी  बोलते हे कि पंडाव् को भी इस हस्तिनापुर के भांग मे से पांडव को भी एक राज्य दिया जय जहां पर वो आराम से रह सके। और शुकून से रह सके। और वाह पर काफी कहने के बाद सभी लोग मन जाते हे। और फिर दुर्योधन भी मान भी जाता हे। बोलता हे ठीक हे मैंने एक टुकड़ा देने के लिए तैयार हूँ। और बोलता हे मैंने श्री कृष्ण कि हर बात मानी हे अब नही भी मेरी बात माननी पढ़े गी। कि इस के पश्चात् वो मुझसे कभी और कुछ नहीं मागगे। तभी मे दूंगा। और पांडव भी मान जाते हे और बोलते हे ठीक हे। मे तैयार हि। फिर दुर्योधन भी बोलता हे मुझे कुछ समय दो मे राज्य का नक्शालल९# देखकर बताता हो कि कौन सा राज दान मे देंगे। फिर दुर्योधन जाता हे और पूरा नक्सा देख लेता हे लेकिन उसको कुछ समज नहीं आता कौन सा राज्य देंगे कि पांडव वाहा ज्यादा दिन तक जीवत नहीं रहे पाये। फिर वी अपने मामा शकुनि से पूछ्ता हे short story in hindi motivational

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कि अब आप हि कुछ बताओ। तो फिर उनके मामा बोलते हे हा ऐसा भी राज्य हे जहां पर ना एक भी अन्य का दाना हे और ना हि पीने को पानी हे और ना हि आदमी हे। बिलकुल हि बंजर ज़मीन हे। जहां पर लाखो युद्ध लड़े गए हर जगह लांस दफ्न हे

और उस राज्य का नाम खांडवप्रसत फिर दुर्योधन जाकर पांडव को दान मे खांडवप्रसत दान मे दे देता हे। जैसे हि इस राज्य का नाम सब लोग सुनते तो बोलते हे तू पागल तो नहीं हो गए तुम जानते हो क्या बोल रहे हो । फिर भी दुर्योधन नहीं मानता हे और बोलता हे। जो दान मे दिया जा रहा हे इन्हें वो हि लेना होगा। नहीं लेना हे तो कोई बात नहीं । फिर पांडव भी मान् जाते हे और निकल पड़ते हे अपने राज्य कि और और वाहा पर जाते हे रहना चालू कर देते हे। और फिर निकल पड़ता हे

     अर्जुन का सर्पराज के साथ युद्ध

राज्य कि एस्थपना हेतो सभी लोग मिलकर एक ज़मीन ढूढते हे और वाहा पर खुदाई चालू कर देते हे। काफी खोदने के बाद वाह पर एक कंकाल निकल आता हे और फिर वो लोग वाह से निकल जाते हे। और सभी लोग वापस चलें जाते हे। तो अर्जुन निकल पड़ता हे। राज्य कि एस्थपना हे तो फिर वो काफी देर बाद एक जंगल मे पहुँच जाता वाहा अरे जाने के बाद सोचता हे कि मे अपना राज्य यही पर इस्थपित् करूंगा। और फिर वाहा पर वो पेड़ को काटना चलो कर देता हे। जैसे हि पेड़ को काटने लगता हे तो देखता हे उसे चारों तरफ सांप ने घेर लिया हे। और फिर वाह पर उन सभी सांपो का राजा आता हे और  अर्जुन से बोलता हे कि कौन हो तुम और तुमने यहाँ आने का दूशहशस् कैसे किया। तुम्हें अपने प्राणो का मोह नहीं हे। short motivational story in hindi for किड्स

चलो जाओ वरना मे तुम्हें मर दूंगा तो अर्जुन बोलता हे तुम इस जगह को छोड़ कर चलें मे इस जगह का राजा हो अगर तुम्हें जीवित रहना हे तो यहाँ से चलें जाओ तो फिर वो सर्प राज बोलता हे कौन हो तुम फिर अर्जुन बोलता हे मे पाण्डु पुत्र अर्जुन हूँ फिर् वो सर्पराज बोलता हे तो तुम अर्जुन हो मैंने तुम्हरे बारे मे बहुत सुना हे। फिर भी अगर तुम्हें जीवित रहना हे तो यहाँ से चलें जाओ तुम नहीं जानते मे किस कि सुरक्षा मे हो तो अर्जुन बोलता अब मे यहाँ का राजा हूँ और मे राज्य यही पर हि बनाऊ गा तो फिर वो सर्पराज बोलता हे मे इद्र्देव् कि सुरक्षा मे हूँ। तुम उनसे नहीं जीत सकते हो। फिर अर्जुन उस जंगल मे आग लगा देता हे। और फिर उसके बाद जो वो सर्पराज होता हे वो इद्र्देव् का अह्वान करता हे। और फिर इद्र्देव् के साथ अर्जुन का युद्ध होता हे।short motivational story for students और ये युद्ध काफी देर तक चलता रहता

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अर्जुन के सारे बाढ़ निष्फल हो जाते कोई भी बाढ़ उस जंगल तक जा हि नहीं पाता। फिर वाहा पर श्री कृष्ण जी आ जाते हे। जैसे हि अर्जुन श्री कृष्ण को देखते हे। तो बोलते आप हि बताओ इस युद्ध को कैसे जीता जये तो फिर वो बोलते हे। तुम्हें ऐसी अग्नि चहिए जिसे कोई भी साधारण वर्षा भुजा ना सके। फिर अर्जुन बोलते हे ऐसी अग्नि तो सिर्फ अग्निदेव के पास हे। तो फिर कृष्ण जी बोलते हे।short motivational story in hindi for students

आप लॉगो को ये स्टोरी कैसी लगी जरूर मुझे बताए और इसे  पूरा पढ़ने के बाद हि जाना true motivational stories in hindi

तुम्हें अग्निदेव् को प्रसन्न करना पढ़ेगा लेकिन उनको प्रसन करने के लिए तो वर्षो तपस्या करना पड़ता हे। फिर कहीं वो प्रसन होते हे। तुमने क्या किया हे। जो वो तुम्हें वरदान देंगे। फिर अर्जुन बोलते बस आप देखिए। वो अपने चारों और आग लगा लेते हे और बोलते हे कि लोग आपको हवन कि अहुति देते हे मे अपनी अहुति देता। अग्निदेव्। अगर आप ने मुझे दरशन नहीं दिया तो मे अपना जीवन त्याग दूंगा। short story in hindi motivational

फिर वाहा पर अग्नि देव प्रकट हो जाते हे और फिर बोलते अर्जुन तुमने मुझे प्रसन्न किया बताओ तुम क्या मांगते हो मे तुम्हें एक बरदान देना चाहता हूँ। तो फिर अर्जुन बोलता हे कि आप मुझे अपनी सम्पूर्ण अग्नि सकती देदीजिये जिससे मे भीषण अग्नि लगा सकू। लेकिन मे तुम्हें ये वरदान दे तो दूँ लेकिन् वो हाथ हे हि नहीं जो मेरी सम्पूर्ण सकती का संगहान कर सके तो फिर अर्जुन बोलते कि ये रहे वो हाथ मे आपकी पूरी सकती का  संगहान कर सकता हो। फिर वो अर्जुन को गाण्डीव प्रदान करते हे। short story in hindi motivational तभी से अर्जुन को गाण्डीव धरी अर्जुन भी कहा जाता ह

    इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती हे।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हे कि अगर आपका संकलप दृढ हो तो आपको कोई भी नहीं हरा सकता और आपको एक ना एक दिन सफलता मिल हि जाएगी। पांडव मे सभी लो वाहा से आने बाद बैठ जाते हे और अर्जुन नहीं बैठता हे। इसी लिए उसने इतिहास लिखा इतिहास वही लोग लिखते हे जो कभी रुकते नहीं। तो इसी लिए कर्म करते रहे।short story in hindi motivational

                 जय श्री राधे कृष्णा ।

 

 

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