Motivational story|| अंतिम सत्य तो सिर्फ प्रेम हि हे। राधाकृष्ण motivation story

🙏 Motivational story|| अंतिम सत्य तो सिर्फ प्रेम हि हे। राधाकृष्ण motivation story 🙏


 कहानी का शीर्षक।।”:- राधाकृष्ण motivation story

Radhakrishn motivation story            

आप सभी लॉगो को मेरा प्रेम भरा नमस्कार। मे आपका दोस्त आपका साथी हर्ष आप लॉगो का स्वागत करता हो। राधाकृष्ण motivation story

1.motivation story मेरे पास आज संवाद आया बहुत हि मार्मिक और अद्भुत संवाद था। मे आप लॉगो को बताने से रोक हि सका। राधा कृष्ण से बिछड़ी फिर नहीं मिली अगर स्वर्ग मे विचरण करते होए टकरा जये तो क्या बात हगी।motivation story एक बार स्वर्ग मे विचरण करते होए अचानक एक दूसरे के सामने आ  गए विचलित थे कृष्ण प्राश्चित थी राधा। कृष्ण इस लिया विचलित थे क्योकि प्रेम से अलग हो कर गए थे। राधा इस लिए प्राश्चित थी क्योकि वो प्रेम मे डूबी हुई थी। देखते हि कृष्ण सक्पक्ये राधा मस्करी इससे पहले कुछ बोलते श्री कृष्ण राधा बोल पड़ी कैसे हे द्वारिका दीस।motivation story
राधाकृष्ण motivation story  अब आप अपने लड़के को रामु और श्यामू कहकर बोलते हे और एक दिन उन्हें उनके नाम से बोलिए गे तो उन्हें लगे गा कि पापा हमसे नाराज हे जो राधा कान्हा कान्हा कहते थकती नहीं थी। वो आज द्वारिका दीस। बोल रही हो। यह सुनकर कृष्ण को अंदर से ढका को लगा  पर उन्हों ने संभाल लिया। और बोले राधा तुम मुझे कब से द्वारिका दीस कहने लगी। मे तो तुम्हरे लिए तुमरा कान्हा हि हो। आओ  बैठते हे कुछ तुम कहो कुछ मे कहो। राधा बोली कृष्ण कुछ कटु वचन बोले अगर सुन पाओ तो कहे। तो कृष्ण जी बोले। कहो राधा क्या बोलना चाहती हो कहो। राधा। कान्हा से द्वारिका दीस के बनने के बाद् तुमने क्या खोया क्या पाया इसका एक इआना दिखाओ जिंदगी यमुना के के मीठे पानी सी शुरू कि आज समुद्र के खारे पानी तक पहुँच गए। एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्र पर भरोसा कर लिया दसो ऊँगली पर चलने वाली बासुरी को भूल गए।motivation story


Motivation kahani.कृष्ण जब प्रेम से जुड़े थे तब ऊँगली पर गोवेर्धन पर्वत को उठाकर लॉगो को विनाश से बचाते थे प्रेम से अगल हमे पर होने पर वही ऊँगली सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम आने लगी। अंग तो वही होता हे जो प्रेम से जुड़ता हे तो विकास करता हे और जब प्रेम सर अलग होता हे तो विनाश करता हे। कान्हा और द्वारिका दीस मे अंतर बताओ। अगर तुम कान्हा होते तो सुदामा तुम्हारे घर कभी नहीं आता बल्कि तुम सुदामा के घर जाते। तुम तो सभी कलाओ के स्वामी हो गीता जैसे ग्रन्थ के दाता हो नीति निर्माता हो कर्म शास्त्र का दाता हो पर महाभारत मे क्या निर्णय लिया अपनी पूरी सेना कौरवो  को सौप दी। और खुदको पांडवो को पांडव को सौप दिया। सेना तो आपकी प्रजा थी। राजा तो उसका पालक होता। रक्षक होता हे। आप जैसा महाज्ञानी उस रथ को चला रहा था जिस पर बैठा हुआ अर्जुन आपकि प्रजा पा तीर चला रहा था। अपनी प्रजा को मरते देख आप मे करुणा नहीं जगी। क्योकि आप प्रेम से शून्य हो कर गए थे। प्रेम और युद्ध यही अंतर होता हे। प्रेम मे लोग मिट कर जीतते हे और युद्ध मे लोग मिटाकर जीतते हे। motivation story
जाकर देखो धरती पर ढूढते  रहेजाओगे अपनी द्वारिका दीस वाली छवि को। आज भी लोग पूजते हे पर द्वारिका दीस वाली छवि को बरसाना के कान्हा को पूजते  हे। हर जगह मेरे साथ हि खड़े नज़र आओगे। आज भी लोग गीता को पड़ते हे उसका नृत्य नियम पाठ करते जिस गीता मेरा दूर दूर तक कोई नमो निसान तक नहीं था उसके समापन पे राधे राधे करते। 
 

                


1 thought on “Motivational story|| अंतिम सत्य तो सिर्फ प्रेम हि हे। राधाकृष्ण motivation story”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *