अर्जुन रोचक किस्सा । हनुमान जी कि वजह से करनी पढ़ी अर्जुन को आत्मदाह करने कि कोशिश ।

का सारांश।”:- अर्जुन और हनुमान जी के बीच लगी शर्त।

कहानी का शीर्षक।”:- हनुमान जी से शर्त मे निष्फल होने के बढ़ करने जा रहे थे। आत्मदाह।”

कहानी के सारे देवता एवं प्रथ्वी के वीर योद्धा“:- श्री कृष्ण जी। एवं हनुमान जी एव् महावीर अर्जुन जी। और । दानवीर कर्ण ।

एक बार कि बात जब महाभारत का समय था। तब कृष्ण जी अर्जुन जी एक और प्रस्थान हि। कर रहे थे। कि अर्जुन कृष्ण जी से बोलते हे। मुझे आपकी पूजा तो कर लेने देते प्रभु क्योकि मे आपको अपना भगवान मानता हो। तो मे आपकी पूजा करना चाहता हो तो क्या मे पूजा कर सकता हो तो प्रभु  बोलते अगर आपकी यही इच्छा हे तो कर लीजिये। लेकिन आपको पूजा के लिए। फूल तो चाहिए हे होंगे। 

अर्जुन बोले।” ठीक हे प्रभु मे लेकर आता हो तब तक आप यही विश्राम किजिये अर्जुन निकाल जाते हे फूल लेने काफी देर तक फूलो का बगीचा ढूढते रहते हे पर कोई बगीचा नहीं मिलता हे। लेकिन उनके लगातार परिश्रम करने बाद उन्हें  आखिर एक बगीचा मिल हि जाता हे और उसका नाम। कदलैइ वन होता हे  वो वाहा जाकर फूल तोड़ने लगते जैसे हि वो फूल तोड़ने चलें तो वाहा पर थोड़ी हि आवाज लगी तो वाहा जो वन कि रक्षा कर रहा था उत कर खड़े होए और वो कोई और नहीं हनुमान जी थे  जो उस वन कि रक्षा कर रहे थे। वो अर्जुन से बोलते हे। क्या कर रहा हे बालक यहाँ क्या करने आया हे। 

 तो अर्जुन बोलते हे कि मे फूल तोड़ने आया हो मुझे थोड़े से फूल चाहिए तो हनुमान जी बोलते हे कि फूल लेने आया कि चोरी करने आया ना पूछ्ना ना जांचना सीधे आय और तोड़ कर लिए जा रहे। हो बालक। तो अर्जुन बोलते हे कि इतने छोटे से काम के लिए पूछ्ना क्या। दो चार फूल हो तो चाहिए इसमें इतना बड़ा मैंने क्या कर दिया जो आप नाराज हो रहे हे। अरे फूल लेने आय हे तो पुच्छ तो लो । तो  अर्जुन बोले इसमें पूछ्ना क्या । तो हनुमान जी बोले कि अच्छा बताओ किस लिए चाहिए ये फूल क्या काम हे तुम्हें । तो अर्जुन बोले मुझे भगवान श्री कृष्ण जी कि पूजा के लिए चाहिए। तो अब सुनिए जो यहाँ से स्टार्ट होने वाला हे  वो तो बहुत हि मजेदार हे।

जब अर्जुन ने ये बोला तो हनुमान जी ने हसने लगे। तो अर्जुन बोले कि हस क्यूँ रहे हे तो हनुमान जी बोले फिर तुम फूल ले जाओ तो अर्जुन बोले अभी तो मेरे फूल तोड़ने पर क्रोधित हो गए थे। तो हनुमान जी बोले जिनके भगवान हि चोर हो उनके लिए चोरी से फूल ले जाकर पूजा करना कोई बड़ी बात नहीं तुम फूल ले जाओ मे तुम्हें नहीं रोको गा। 

अर्जुन ने जैसे हि इतना सुना वो क्रोध से बर गए क्योकि उनके तो भगवान का अपमान हो गया था भैया अर्जुन तो क्रोध मे फिर वो भी खरी खोटी लगे सुनाने। हा हा देखा हे। तुम्हरे भगवान बड़े महान हे। वानर बंदरो से पूल बनवा दिए बड़े महान हे। तुम्हरे भगवान इतने महान हे तो खुद बड़ो का संहार करके पूल बना देते बेचारे वानर से पूल बनवा दिया।

हनुमान जी बोले।”:-देख लो अर्जुन जो श्री राम जी ने पूल बनाया था। उस पर हजारों वानर और भालो चल कर निकल गए थे। क्या तुम बना सकते हो बड़ो का संहार करके पूल अर्जुन बोले हा मे बना सकता हो। तो “हनुमान जी बोले।”ठीक हे तुम्हरे पुल से श्री राम का एक हि वानर निकल जाए तो मानेगे । लेकिन अगर टूट गया तो अर्जुन बोले अगर टूट गया तो मे अभी लड़की इक्कठा करके आग लगाकर जल मर जाऊगां। तो हनुमान जी बोले अगर पुल नहीं टूटा तो जो तुम कहो गै मे  करूगां। 

फिर अर्जुन ने करा तीर का संहार बना दिया  तीर का एक शानदार सा पुल फिर अर्जुन बोले तैयार हे पुल कहा हे तुम्हरे श्री राम का वानर। तो हनुमान जी बोले तैयार हे वानर। भैया फिर हनुमान जी ने भी बढ़ाया रूप इतने बड़े हो गए कि सूरज डाक गया अर्जुन कि तो आँखे हो बंद हो गई। जैसे हि हनुमान जी ने पेर रखा पुल तो साला पाताल मे घुस गया हनुमान जी बोले कहा हे। पुल दिखीयि नहीं दे रहा। अर्जुन बोले अब पुल बनाने वाला भी नहीं  दिखीयि नहीं देगा चलें लकडिया ढूढने लगे इक्कठी करके आग लगाने कहते अब जान देना हि उच्यत् होगा। तो हनुमान जी बोलते हे अरे मारो नई भाई जीवन बहुत कीमती हे। 

  

इसकी जो आगे कि स्टोरी हे वो आप लॉगो को अगले पार्ट मे मिलेगी और ये आगे और भी ज्यादा मजेदार हमे वाली हे। आप लोग आगे के पार्ट ले कितने उत्सुक्त हे । जरूर कमेंट मे बताए । धन्यवाद।

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